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Thursday, April 18, 2019

रामलीला

रामलीला 
मुझे इस चुनाव में मोदीजी की कम बाबा रामदेव की अधिक चिंता है ! यदि बीजेपी हार गई तो उनके 'स्वदेशी माल' का क्या होगा, जो वर्तमान में हर नुक्कड़ पर पहुँच गया है ? क्या बाबा का 'दन्तकांति' दन्त मंजन दिग्विजय सिंह जी जैसे कांग्रेस के आला राजनीतिबाजों के दांतों की कांति बरकरार रख पाएगा ?

दिल्ली रामलीला मैदान में उनका 'सलवार सूट' पहन कर मंच से भागने वाला सीन जहाँ भारत के राजनीति में दहशत पैदा करता है, वही जनमानस में बाबाओं की विविध लीलाओं का बेदर्दी से पर्दाफाश करता है ? यह सच है कि कई बाबा अपने कारगुजारियों से सीकंजों के पीछे पहुँच गए हैं, जबकि रामदेव बाबा ने 'योगा' के साथ-साथ बिजनेस में एंट्री मार कर बड़ी-बड़ी विदेशी मल्टी-नेशनल कंपनियों की बेंड बजा दी है. मगर अगर सत्ता बदलती है तो क्या वे कंपनिया बाबा रामदेव की बेंड नहीं बजाएंगे ? देखना होगा यह 'रामलीला' कैसे होगी ?

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