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Sunday, May 19, 2019

जो जस करहिं, तस फल चाखा-

जो जस करहिं, तस फल चाखा-
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को मोदीजी, जैसे कि उन्होंने कहा है, दिल से क्षमा नहीं कर पाएंगे. ठीक है, न करें. क्योंकि, इससे न तो साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का कुछ बनता बिगड़ता है और न मोदीजी का, जो आजकल चुनाव के दौरान जाने-अनजाने किए 'पाप' का प्रायश्चित करने भगवान शिव की शरण में हैं. चाहे गाय के नाम पर 'माँब लिंचिंग' हो या शहीद हेमंत करकरे के नाम पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की उम्मीदवारी, बीज तो उन्होंने ही बोया है. आज नहीं कल, भुगतना उन्हीं को होगा. 'बजरंग दल' हो या 'हिन्दू महासभा'; 'मोदीजी', इनके लिए शतरंज के 'प्यादे' हैं. खबर (TOI : 18 May 2019) यह भी है कि हिन्दू महासभा ने गांधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की जन्म शताब्दी भव्य रूप से मनाने का फैसला किया है. मैं डाल डाल, तू पात-पात !

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