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Thursday, August 22, 2019

विपस्सना

विपस्सना चार्य गुरु गोयनकाजी,सिद्धार्थ के अभि-निष्क्रमण का कारण रोहणी नदी जल विवाद से परे, सांसारिक जीवन के विरुद्ध शाक्य राजकुमार के चित में उठा एकाएक वैराग्य का संवेग बतलाते हैं ? सवाल है, डॉ अम्बेडकर द्वारा स्थापित तथ्यों को छोड़ कर वे हिन्दू लेखकों द्वारा समर्थित कथानक को क्यों प्रतिष्ठापित करना चाहते हैं ? क्या वे डॉ अम्बेडकर को नकारना चाहते हैं ?

अगर बात सिद्धार्थ के अभि निष्क्रमण की ही होती, तो कोई बात नहीं. गोयनकाजी सिद्धार्थ गौतम के जीवन से सम्बंधिक्त प्रमुख घटनाओं, चाहे जन्म, विवाह, अभि निष्क्रमण, धम्म चक्क पवत्तन अथवा महा परिनिर्वाण; यही नहीं, सिद्धार्थ के जीवन की तमाम प्रमुख घटनाओं और बुद्ध के दर्शन को पौराणिक हिन्दू चिंतन धारा से विश्लेषित करते हैं. वे बुद्ध के दर्शन को हिन्दू पुनर्जन्म और कर्म से जोड़ते हैं ? विपस्सना के सम्बन्ध में यह हमारा सैद्धांतिक मतभेद है.

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