Saturday, January 30, 2021

सतधारा स्तूप

सतधारा- 

विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप से 11 कि. मी. दूर पश्चिम में दो बड़े बौद्ध मठ और 29 छोटे स्तूप बने हुए हैं, जो करीब 2500 साल पुराने हैं। ये स्तूप 13 मीटर तक उंचे हैं।

इस स्थान को सतधारा कहते हैं। प्रगट रूप से सतधारा का अर्थ सात धाराएं हैं। ये सभी स्तूप हलाली नदी के किनारे लगभग 28 एकड़ की जमीन पर फैले हुए हैं। 

हजारों साल पुराने होने के करण ये जर्जर हो चुके हैं, यद्यपि कई को जीर्णोद्धार के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया है। हिस्ट्री आर्ट एंड आर्किटेक्चर में इन स्तूपों को मौर्यकालीन बताया गया है, जिनका विकास सम्राट अशोक के समय हुआ है।

इन स्तूपों पर प्राचीनकालीन राॅक पेंटिंग है, जो कि 4 से 7 ईस्वी सदी पुरानी है। 1853 में इन्डोलाजिस्ट सर एसेक्जेंडर कनिंघम ने स्तूप न. 2 को तोड़कर उसमें प्रवेश किया था, पर उन्हें इन स्तूपों के निर्माण का पता नहीं चला। पुरातत्ववेत्ता ए. के. सिन्हा बताते हैं कि इन स्तूपों के निर्माण के पीछे की कहानी आज भी अनसुलझी है। हालाकि कई इतिहासकार इन्हें बुद्ध के समय और उसके बाद बनाये गए बतलाते हैं.

 ये स्तूप शांति  के स्थल थे जहां बौद्ध भिक्खु निवास करते थे.

No comments:

Post a Comment