Thursday, December 6, 2012

'एजेड' के चक्कर में क्यों पड़ते हैं ?

मेट्रो में खड़ा मैं उस इबारत की और देख रहा था जिसमें लिखा था कि यह वृद्ध और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों की सीट है।  मैं दिस 2010 में 58 वर्ष की उम्र में रिटायर हो कर इस वर्ष दिस 12 में 60 क्रास कर चुका था। मैंने 2 बजे का समय जान-बुझ कर चुना था ताकि रस के आवर्स नहीं रहे। सुबह या साम को जब आफिस जाने या वापिस लौटने  का समय होता है, काफी रस होता है।
मैंने सुन रखा था कि शुरू में 4 बोगिया लगायी गयी थी जो बाद में 6 कर दी गई। मगर, मेट्रो से जाने वालों की संख्या इस अनुपात से दुगनी बढ़ गयी। हालत यह है, जिस तरह बालाजी त्रुपति मन्दिर में अन्दर प्रवेश के लिए लोगों की भीड़ रेंगती  है, उसी तर्ज पर सेक्रेटरीयट और राजीव चौक जैसे स्टेशनों में लोग मेट्रो के अन्दर जाते हैं और बाहर निकलते हैं।
मुझे तिलक नगर जा कर फिर वापिस लौटना था। इसके लिए येलो लाइन की मेट्रो से राजीव चौक में चेंज कर ब्ल्यू लाइन पकड़नी होती है। मैंने गुरु द्रोणाचार्य चौक से मेट्रो पकड़ी थी। ज्यादा भीड़ तो नहीं थी मगर, सारी सीटें भरी हुई थी। यह सोच कर कि एक दो स्टेशन बाद कोई न कोई तो उतरेगा, मैं एक लम्बी सीटर के पास खड़ा हो गया।
मेट्रो एक के बाद एक स्टेशन क्रास कर रही थी। मगर, दोनों साईड बैठे लोग जो अधिकतर नवजवान थे, हिलने का नाम नहीं ले रहे थे।एक ने तो अर्जनगढ़ के बाद, उलटे लेपटाप खोल लिया था। उसके बगल में बैठा दूसरा  नवजवान जो शायद उसका साथी था, गाईड कर रहा था। एक लडकी जो शुरू से ही मोबाईल पर किसी से बात कर रही थी, कहीं से भी नहीं लग रहा था कि उसे उतरने की जल्दी है।  पहले सिरे के कोने में बैठा नवजवान पीछे सिर टिकाये आराम से ऊंघ रहा था। दूसरे कोने में बैठा एक युवक- युवती का जोड़ा न ख़त्म होने वाली बातों में मग्न था। एक एंग्लो इन्डियन टाईप लड़का जिसने अपने लेपटाप वाला बैग बगल में रखा था, बीच-बीच में मेरी ओर  उचटती निगाह डाल देता था जैसे मैं कोई 'एक्स्ट्रा' आदमी हूँ।
  ग्रीन पार्क गुजरने के बाद मैंने हिम्मत की - "बेटे, यहाँ मैं बैठ जाऊं क्या ?" असल में ये दोनों सीटों के ऊपर ही वह इबारत लिखी थी।
उसने अजीब-सी नजर से मुझे देखा और माथे पर बल देते हुए कहा- " अंकल, यहाँ सात सीट आलरेडी से बैठी  हैं !"
"मगर, ये सीट एजेड लोगों के लिए है ?"
"आप तो 'एजेड' नहीं  है ना  ?"
" मैं 60 क्रास कर चुका हूँ।" - मैंने सफाई दी।
"मगर , आपके बाल तो काले हैं ?"
" ये तो मेहंदी लगाया है।"
"तो लगाते रहिए, 'एजेड' के चक्कर में क्यों पड़ते हैं ?"





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