देसस्स सासका
गच्छ,
अत्तनो घरस्स भित्तिसु
लिखाहि-
"मयं
अस्स देसस्स
सासका."
जाओ
अपने घर की दीवारों पर
लिख दो-
कि हम
इस देश के शासक हैं.
देसस्स सासका
गच्छ,
अत्तनो घरस्स भित्तिसु
लिखाहि-
"मयं
अस्स देसस्स
सासका."
जाओ
अपने घर की दीवारों पर
लिख दो-
कि हम
इस देश के शासक हैं.
अहं घरस्स कचवरं पठि, किं मग्गो अत्थि ?
मग्ग विसये न संसयं.
ते पुब्बे बाबासाहबेन दस्सितं
घरे यदि कचवर अत्थि, तस्स संसोधनं आवस्सकं.
बुद्ध का अट्ठंगिक मार्ग-
1. सम्यक दिट्ठि- भले-बुरे का ठीक-ठीक ज्ञान.
2. सम्यक संकल्प- राग, द्वेष रहित संकल्प.
3. सम्यक वाचा- झूठ, चुगली और कटु वचन न बोलना.
4. सम्यक कम्मान्त- हिंसा, चोरी, व्यभिचार रहित कर्म.
5. सम्यक जीविका- अनवर्जित कर्म करते हुए आजीविका चलाना.
6. सम्यक वायाम- इन्द्रियों का संयम.
7. सम्यक सति- सति(स्मृति) बोध को सतत क्रियाशील रखना.
8. सम्यक समाधि- कुशल कर्मों के सम्पादन और अकुशल कर्मों के त्याग का सतत चिंतन.
महा समुद्र किनारे से गहरा नहीं होता. क्रमश: गहरा होता है. इसी तरह धम्म का ज्ञान धीरे-धीरे गहरा होता है.
भदंत आनंद कोसल्यायन पंजाब में जन्में (5 जन. 1905) थे, पर उनका कार्य-क्षेत्र भारत में सारनाथ, वर्धा और अपने जीवन के उत्तरार्ध में नागपुर रहा. वे अपने जीवन के अंतिम दिनों तक(22 जून 1988) लिखते रहे.
सन 1964 में राहुलजी के देहांत का तार लंका में आया तो हम लोग केन्डी के एक विहार में थे. भंतेजी उस समय अंगुत्तर निकाय का अनुवाद कर रहे थे. तार पढ़ कर एक क्षण आँखे मुंदकर मौन रहने के बाद कहने लगे- अब तो राहुलजी के हिस्से का भी लिखना है, और लिखने लगे(भिक्खु मेघंकर: सम्पादकीय: धम्मपद).