Friday, December 9, 2011

कविताएँ (संकलन)

रामराज्य का फरमान


संदेह करने वालों को उम्र कैद                            
तर्क करने वाले को फांसी                                  
अल्पमत पर बहुमत का धर्म राज                      
नास्तिकों को सूली
इन सबको
दैहिक-दैविक-भौतिक ताप से
पूर्ण मुक्ति।  
                    ('अन्यथा' अंक जन.1993) 

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सुनो सवर्ण                                                      

मानता हूँ तुम सवर्ण हो                                    
लेकिन मेरा तो कोई                                      
वर्ण नहीं है                                                    
क्योंकि, तुम्हारे ही शब्दों में                              
मैं अवर्ण हूँ                                                   
आश्चर्य होता है फिर भी मुझे
मन्दिरों पर नहीं चढ़ सकता था
कि तुम्हारी वर्ण-व्यवस्था का
चौथा हिस्सा मैं
 कब और कैसे हो गया                                         
 जबकि वेद नहीं
 सुन सकता था
 धर्म-ग्रन्थ नहीं पढ़ सकता था

                                   महेंद्र बैनीवाल: नई दिल्ली

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Sis. Mayavati

 Sis. Mayavati tenure(UP State)
First-          3 Jun.1995 to 18 Oct 95
Second-     21 March 1997 to 20 Sept. 1977
Third-         3 May 2002 to 26 Aug. 2003
Forth-         13  May 2007 to Oct.08

BSP-14 April 1984

























बापू का अपमान,राष्ट्रीय अपमान

          अमेरिकी लेखक जोसेफ लेलीवेल्ड ने अपनी पुस्तक 'Great soul Mahatma Gandhi and; his struggle with India' में गाँधीजी पर कुछ टिप्पणियाँ की है.
     गाँधी जी का व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन है ही ऐसे विरोधाभाषों का कि लोग  न चाह कर भी जाने-अनजाने टिप्पणी करते रहते हैं.अगर आप ब्रम्ह-चर्य पर लेख लिख रहे हैं तो गाँधी बीच में कूद पड़ते हैं.अगर आप धर्म-ग्रंथों की सामाजिक उपयोगिता पर सोच रहे हैं तो गाँधी जी लाठी लेकर खड़े हो जाते हैं. अगर आप राजनीती के सुचिता पर चिंतन करते हैं तो गांधीजी का 'अगर-मगर' वाला दर्शन रोकता है. गोया, आप  जिस किसी विषय पर लिख रहे हैं, अगर वह भारतीय परिवेश में है, तो बगैर गाँधी जी के आप लिख ही नहीं सकते. अब, लोग लिखते है और चाहे-अनचाहे टिप्पणी करते हैं. 
        इसी तरह की टिप्पणियों से आहत केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय-सम्मान में संशोधन करने का प्रस्ताव किया है ताकि बापू का अपमान भी राष्ट्रीय-झंडे के अपमान की तरह ही लिया जा सके.
      न्यूयार्क टाइम्स के पूर्व सम्पादक और पुलित्जर पुरस्कार विजेता जोसेफ लेलीवेड ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि महात्मा गाँधी सम-लैंगिक थे.पुस्तक में आगे कहा गया है कि 13 वर्ष की उम्र में 14 वर्ष की कस्तूरबा से शादी करने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी अलग रहने लगे थे.वे हर्मन कोलेनपॉश नामक शख्स को प्यार करते थे.
       पश्चिमी और अमेरिकी मिडिया ने किताब के उन अंशों को प्रकाशित किया है.महात्मा गाँधी पर लिखी गई उक्त विविदास्पद पुस्तक पर गुजरात सरकार  द्वारा लगाये गए प्रतिबन्ध पर प्रतिक्रिया देते हुए लेखक जोसेफ लेलोवेल्ड ने कहा कि खुद को लोकतन्त्र घोषित करने वाले देश में पुस्तकों पर प्रतिबन्ध लगाना शर्मनाक है.

दलीतों का प्रश्न ?

सत्ता हस्तांतरण के दौरान दलित जातियों की समस्याओं को डा. अम्बेडकर बड़ी सिद्दत के साथ उठा रहे थे। अंग्रेजों को  कांग्रेस, दलितों के प्रश्न को अपना अंदरूनी मामला बता रही थी।

हिन्दू महा सभा के पूना अधिवेशन में पं.मदन मोहन मालवीय से डा. आम्बेडकर ने सवाल किया-
"जिन दलितों ने धर्मान्तरण कर लिया है, यदि वे वापिस आना चाहे तो आप उसे किस जाति या वर्ण में रखेंगे ?" 
"जिस जाति से वे गए थे" - पं.मदन मोहन मालवीय ने जवाब दिया.

आम्बेडकर के धर्मान्तरण में म. प्र.और छति.

        बात तब की है, जब हिन्दुओं की हठ-धर्मिता के कारण डॉ.आंबेडकर ने सामूहिक धर्मान्तरण की घोषणा कर दी थी। हिन्दू, एक तरफ तो मुसलमानों को रियायतें देने के पक्ष में थे, किन्तु अपने सह-धर्मी दलित भाइयों  को जरा भी रियायतें देने तैयार नहीं थे।

उधर, अपनी घोषणा के तारतम्य में डा. आंबेडकर दलित जातियों का मूड भांपने पूरे देश का दौरा कर रहे थे। इस तारतम्य में देश की दलित जातियों के मूड की एक बानगी द्रष्टव्य है-

म.प्र. के राजनांदगावं में 8 जुला.1936 को  दलित फेडरेशन की आम सभा बाबू बंशीदास की अध्यक्षता में संपन्न हुई। परसराम जी, बाबू लालाराम जी, कारूलालजी,  धनाराम आदि प्रमुख वक्ताओं के भाषण हुए। बाबू बंशीदास के नेतृत्व में एक होम कुण्ड जला कर इस सभा में उपस्थित दलित संत-महंत और साधू-महात्माओं ने अपनी- अपनी कंठी-माला, जटा-दाढ़ी निकाल कर होम-कुण्ड में अर्पण कर दी और बाबासाहब डा. अम्बेडकर द्वारा की गई धर्मान्तरण-घोषणा का स्वागत और समर्थन किया।