Thursday, November 22, 2018

बुद्ध की आशंका (ञाणी सुत्त)

बुद्ध की आशंका
सावत्थि में विचरण करते,
सावत्थियं विहरति,
भिक्खुओ! पूर्वकाल में दसारहो का
भूतपुब्बं भिक्खवे, दसारहानं/दसभातिकानं
'आनक' नामक एक मृदंग हुआ करता था।
आणको नाम मुदिंगो अहोसि
उसमें जब कोई छेद होता तो दसारह लोग
तस्स दसारहा आनके घटिते/फलिते
 एक खूंटी ठोंक देते थे।
अञ्ञं आणि ओदहिन्सुं
धीरे-धीरे, एक ऐसा समय आया
अहु खो सो, भिक्खवे, समयो
कि सारे मृदंग की
यं आणकस्स मुदिंगस्स
अपनी पुरानी लकड़ी कुछ भी नहीं रही।
पोराणंं पोक्खर फलकंं अन्तरधायि
सारे का सारा खूँटियों का एक खच्चर बन गया।
आणि संघाटोव अवसिस्सि ।

उसी प्रकार भिक्खुओ! भविष्य में
एवमेव खो भिक्खवे, अनागत अद्धानं
ऐसे भिक्खु होंगे
भविस्संति भिक्खू
जो तथागत ने जो सुत्त कहे हैं
ये ते सुतन्ता तथागत भासिता
गंभीर, गंभीर अर्थ सहित
गंभीरा गम्भिरत्था

उनके विस्तार पूर्वक कहे
तेसु भञ्ञमानेसु
 न अच्छी तरह ध्यान देंगे
न सुस्सूसिस्संति,
न कान देंगे
न सोतं ओदहिस्संति
चित्त को समझने के लिए नहीं लगाएंगे
न अञ्ञा चित्तं उपट्ठापेस्संति
न च ते धम्मे उग्गहेतब्बंं,
न धर्म को सीखने
परियापुणितब्बंं  मञ्ञस्सन्ति
अभ्यास करने के योग्य नहीं समझेंगे।

परन्तु,  बाहर के सावकों से कहे सूत्र
ये पन ते सुतन्ता बाहिरका सावक-भासिता
कवित, चित्ताकर्षक अक्षर- व्यंजन वाले,
कविकता कावेय्या चित्तक्खरा चित्तब्यंजना
विस्तार पूर्वक कहे
तेसु भञ्ञमानेसु
उन्हीं को सुनेंगे
सुस्सूसिस्संति
कान देंगे
सोतं ओदहिस्संति,
चित्त को समझने लगाएंगे
अञ्ञा चित्तं उपट्ठापेस्संति
ते च धम्मे उग्गहेतब्बंं,
इन धर्मों को सीखना चाहिए
परियापुणितब्बंं  मञ्ञस्सन्ति
अध्ययन-मनन करना चाहिए, कहेंगे

इस तरह भिक्खुओ,
एवं तेसं भिक्खवे
तथागत ने जिन सूत्रों कहा
सुत्तन्तानं तथागत भासितानं
गंभीरानं गंभीरत्थानं
गंभीर, गंभीर अर्थ सहित,
उनका लोप हो जाएगा।
अंतरधानं भविस्सति

इसलिए भिक्खुओ!
तस्मातिह, भिक्खवे
तुम्हें ऐसा सीखना चाहिए-
एवं सिक्खितब्बंं
तथागत ने जो गंभीर सूत्र कहे हैं
ये ते सुत्तन्ता तथागत-भासिता
गंभीर, गंभीर अर्थ सहित
गंभीरा गंभीरत्था
तेसु भञ्ञमानेसु
उन्हीं विस्तार पूर्वक कहे
अच्छी तरह सुनेंगे
सुस्सूसिस्साम
कान देंगे
सोतं ओदहिस्साम
अपने चित्त को समझाएंगे
अञ्ञा चित्तं उपट्ठापेस्साम
ते च धम्मे उग्गहेतब्बंं
कि इस धर्म को सीखना चाहिए
परियापुणितब्बंं  मञ्ञस्सन्ति
भलि प्रकार अध्ययन-मनन करना चाहिए
स्रोत- ञाणी सुत्त(19 -7 ) : संयुक्त निकाय भाग- 1
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दसारहानं/दसभातिकानं- एक क्षत्रिय जाति का नाम
आणि- मेख, नाभि
ओदहति- ध्यान देना, निगरानी रखना।
अवस- शक्तिहीन, दुर्बल, कमजोर
भञ्ञमान- विस्तारपूर्वक।     
सुस्सूसति- अच्छी तरह सुनना।
उपट्ठापेति- सेवा में उपस्थित रहना
परियापुणाति - भली प्रकार अध्ययन करना .

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