पालि सुत्तों को संक्षेप में देने का हमारा उद्देश्य धम्म के साथ पालि से परिचय कराना है।
उत्सुक पाठकों से अनुरोध है कि वे बस, इन्हे पढ़ते जाएं-
‘‘भन्ते नागसेन, किं लक्खणा पञ्ञा ?’’
‘‘भन्ते नागसेन, पञ्ञा की क्या पहचान है?’’
‘‘महाराज, ओभासन लक्खणा पञ्ञा।’’
"महाराज, प्रकाशित करना पञ्ञा की पहचान है।’’
‘‘कथं, भन्ते, ओभासन ?’’
‘‘भन्ते, कैसे प्रकाशित करना है?’’
‘‘पञ्ञा महाराज, उप्पज्जमाना
‘‘महाराज, पञ्ञा उत्पन्न होने से
अविज्जन्धकारं विधमेति,
अविद्या रूपी अन्धकार का विध्वंश होता है,
विज्जोभासं जनेति
’’विद्या रूपी प्रकाश पैदा होता है "
ञाणालोकं विदस्सेति। "
ज्ञान का आलोक देखाई देता है। "
‘‘ओपम्मं करोहि?’’
‘‘उपमा दीजिए’’
‘‘यथा महाराज, पुरिसो
‘‘जैसे महाराज, कोई पुरुष
अन्धकारे गेहे पदीपं पवेसेय्य,
अँधेरे घर में दीपक के साथ प्रवेश करे
पविट्ठो पदीपो अन्धकारं विधमेति
दीपक के प्रवेश होते ही अन्धकारे का विध्वंश हो
ओभासं जनेति, आलोकं विदस्सेति
उजाला पैदा हो, आलोक देखाई दे
रूपानि पाकटानि करोन्ति ।’’
चीजें दिखने लगें ।’’
"एवमेव खो महाराज
‘‘उसी प्रकार महाराज
पञ्ञा उप्पज्जमाना
पञ्ञा के उत्पन्न होने से
अविज्जन्धकारं विधमेति,
अविद्या रूपी अन्धकार का विध्वंश होता है
विज्जोभासं जनेति,
विद्या रूपी उजाला पैदा होता है
ञाणलोकं विदस्सेति । "
ज्ञान का आलोक देखाई देता है। "
‘‘कल्लोसि, भन्ते नागसेन’’, यवनो राजा मिलिन्दो आह।
‘‘दुरुस्त है, भन्ते नागसेन।’’-यवन राजा मिलिन्द ने कहा।
स्रोत -पञा लक्खण पञ्हो: मिलिंद पञ्हो
-अ ला ऊके @amritlalukey.blogspot.com
उत्सुक पाठकों से अनुरोध है कि वे बस, इन्हे पढ़ते जाएं-
‘‘भन्ते नागसेन, किं लक्खणा पञ्ञा ?’’
‘‘भन्ते नागसेन, पञ्ञा की क्या पहचान है?’’
‘‘महाराज, ओभासन लक्खणा पञ्ञा।’’
"महाराज, प्रकाशित करना पञ्ञा की पहचान है।’’
‘‘कथं, भन्ते, ओभासन ?’’
‘‘भन्ते, कैसे प्रकाशित करना है?’’
‘‘पञ्ञा महाराज, उप्पज्जमाना
‘‘महाराज, पञ्ञा उत्पन्न होने से
अविज्जन्धकारं विधमेति,
अविद्या रूपी अन्धकार का विध्वंश होता है,
विज्जोभासं जनेति
’’विद्या रूपी प्रकाश पैदा होता है "
ञाणालोकं विदस्सेति। "
ज्ञान का आलोक देखाई देता है। "
‘‘ओपम्मं करोहि?’’
‘‘उपमा दीजिए’’
‘‘यथा महाराज, पुरिसो
‘‘जैसे महाराज, कोई पुरुष
अन्धकारे गेहे पदीपं पवेसेय्य,
अँधेरे घर में दीपक के साथ प्रवेश करे
पविट्ठो पदीपो अन्धकारं विधमेति
दीपक के प्रवेश होते ही अन्धकारे का विध्वंश हो
ओभासं जनेति, आलोकं विदस्सेति
उजाला पैदा हो, आलोक देखाई दे
रूपानि पाकटानि करोन्ति ।’’
चीजें दिखने लगें ।’’
"एवमेव खो महाराज
‘‘उसी प्रकार महाराज
पञ्ञा उप्पज्जमाना
पञ्ञा के उत्पन्न होने से
अविज्जन्धकारं विधमेति,
अविद्या रूपी अन्धकार का विध्वंश होता है
विज्जोभासं जनेति,
विद्या रूपी उजाला पैदा होता है
ञाणलोकं विदस्सेति । "
ज्ञान का आलोक देखाई देता है। "
‘‘कल्लोसि, भन्ते नागसेन’’, यवनो राजा मिलिन्दो आह।
‘‘दुरुस्त है, भन्ते नागसेन।’’-यवन राजा मिलिन्द ने कहा।
स्रोत -पञा लक्खण पञ्हो: मिलिंद पञ्हो
-अ ला ऊके @amritlalukey.blogspot.com
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